नाबालिग के यौन उत्पीड़न के आरोपी अंकुश भारद्वाज को कभी भारतीय शूटिंग में एक होनहार युवा खिलाड़ी माना जाता था। उन्होंने इंटरनेशनल मंच पर कई मेडल जीते। 2008 में 18 साल की उम्र में शूटिंग की दुनिया में तब मशहूर हुए, जब उन्होंने पुणे में कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में 50 मीटर पिस्टल इवेंट में गोल्ड मेडल जीता। उन्हें 2010 के दिल्ली कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चुने जाने की उम्मीद थी। यूथ गेम्स के मेडल और घरेलू प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन की वजह से उनकी इज्जत और बढ़ गई थी। हालांकि, गेम्स से कुछ महीने पहले, डोप टेस्ट में फेल होने के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। जर्मनी के सुहल में हुई एक जूनियर इंटरनेशनल प्रतियोगिता के दौरान भारद्वाज का बीटा ब्लॉकर्स लेने का टेस्ट पॉजिटिव आया था – इन्हें परफॉर्मेंस बढ़ाने वाला माना जाता है क्योंकि ये शूटरों को अपना हाथ स्थिर रखने और कंपन कम करने में मदद करते हैं। भारद्वाज ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने सिरदर्द के लिए दवा ली थी।अब नाबालिग निशानेबाज द्वारा अंकुश भारद्वाज पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआई) ने उन्हें निलंबित कर दिया है। एनआरएआई ने पुष्टि की है कि फरीदाबाद में भारद्वाज के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। मोहाली निवासी भारद्वाज पर पॉस्को अधिनियम की धारा छह (गंभीर यौन उत्पीड़न) और भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2) (धमकी देने से संबंधित) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एनआरएआई के सचिव राजीव भाटिया ने पीटीआई को बताया, ‘‘एनआरएआई ने उन्हें निलंबित कर दिया है और हम उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करेंगे।उन्होंने कहा, ‘‘उन्हें नैतिक आधार पर निलंबित किया गया है। अब उन्हें खुद को निर्दोष साबित करना होगा। जांच पूरी होने तक वह किसी भी तरह की कोचिंग गतिविधि से नहीं जुड़े रहेंगे।’’
भाटिया ने कहा कि एनआरएआई ने 2024 में पेरिस ओलंपिक के बाद 37 सदस्यीय कोचिंग टीम में भारद्वाज को स्थान देने की सिफारिश की थी। उन्होंने कहा, ‘‘एनआरएआई की सिफारिश पर ही भारतीय खेल प्राधिकरण (साइ) ने उन्हें कोच नियुक्त किया था। यह सूरजकुंड में हुई यौन उत्पीड़न की घटना है।’
इस बीच खेल मंत्रालय ने कथित अपराध का संज्ञान लेते हुए कहा, ‘‘सभी हितधारकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि जो युवा खिलाड़ी कोच और संबंधित प्रणालियों पर भरोसा करते हैं, उन्हें इस तरह की स्थिति का सामना न करना पड़े।’’
पीड़िता ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसके अनुसार, पिछले महीने करणी सिंह रेंज में एक अभ्यास सत्र के बाद यह घटना घटी थी।
पिछले साल अगस्त से भारद्वाज के साथ प्रशिक्षण ले रही इस युवा निशानेबाज ने बताया कि वह इस घटना से सदमे में है और उन्होंने बार-बार पूछे जाने पर एक जनवरी को अपनी मां को इसकी जानकारी दी।
अपनी एफआईआर में 17 वर्षीय खिलाड़ी ने आरोप लगाया है कि भारद्वाज उसे मोहाली, पटियाला, देहरादून और दिल्ली जैसे स्थानों पर प्रशिक्षण के लिए बुलाते थे, लेकिन वह हमेशा उसी दिन घर लौट आती थी।
पीड़िता ने कहा कि घटना वाले दिन वह राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए टैक्सी से अकेले ही करणी सिंह रेंज गई थी।
उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता समाप्त होने के बाद जब वह घर जा रही थी, तो कोच ने उसे अपने प्रदर्शन का विश्लेषण करने के लिए रुकने को कहा।
इस युवा खिलाड़ी ने अपनी शिकायत में बताया कि कोच ने पहले उसे फरीदाबाद के सूरजकुंड इलाके में एक होटल की लॉबी में मिलने के लिए कहा। लेकिन वहां पहुंचने पर कोच ने कथित तौर पर उसे अपने कमरे में आने के लिए मजबूर किया और कहा कि उसके प्रदर्शन को लेकर अधिक गहन चर्चा करने की जरूरत है।पीड़ित खिलाड़ी ने बताया, ‘‘कोच ने मुझे लिफ्ट वाले एरिया में आने को कहा। जब मैं लिफ्ट वाले एरिया में गई तो कोच ने मुझसे कहा कि उन्होंने यहां एक कमरा बुक किया है, इसलिए मेरे कमरे में आ जाओ। मैं तुमसे वहां खेल के बारे में बात करूंगा।’’उन्होंने फिजियोथेरेपी तकनीक का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘वह मुझे तीसरी मंजिल पर एक कमरे में ले गए और मैच के बारे में चर्चा की। कुछ देर बाद मैंने सर से कहा कि मैं घर जाना चाहती हूं, लेकिन उन्होंने मुझसे कहा कि वह मेरी पीठ की हड्डी चटका (एक तरह का व्यायाम) देंगे।’’
पीड़िता ने एफआईआर में बताया, ‘‘मैंने तुरंत इनकार कर दिया लेकिन इसके बावजूद सर ने मुझे जबरदस्ती पेट के बल लिटाया और मेरा यौन उत्पीड़न किया। जब मैंने विरोध किया तो उन्होंने मुझे धमकी दी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कोच ने मुझे धमकी दी कि मैं इस घटना के बारे में किसी को नहीं बताऊं वरना वह मेरे पेशेवर करियर को बर्बाद कर देगा। इस घटना के बाद मैं बहुत डर गई और मैंने किसी को कुछ नहीं बताया।’’
इस खिलाड़ी में बताया कि घटना के बाद उनके व्यवहार में बदलाव देखकर जब उसकी मां ने बार-बार उससे पूछा, तब जाकर उसने आखिरकार सब कुछ बताया।
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