यूनुस के सपने हुए खाक, भारतीय उद्योग बांग्लादेश में आने की थी भविष्यवाणी, अब मिलें बंद होने की कगार पर

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नई दिल्‍ली । भारत (India) को लेकर बांग्लादेश (Bangladesh) में हुईं हाल की घटनाओं ने काफी चर्चा बटोरी है। खासकर अंतरिम नेता और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) की एक पुरानी भविष्यवाणी खूब वायरल हो रही है। पिछले साल यानी 2025 में यूनुस भारत (India) पर ट्रंप के भारी भरकम टैरिफ से बेहद खुश नजर आ रहे थे। इतना ही नहीं, उन्होंने यहां तक दावा कर दिया था कि भारतीय इंडस्ट्रीज (विशेष रूप से टेक्सटाइल सेक्टर) बांग्लादेश में फैक्टरियां लगाएंगी, क्योंकि वहां उत्पादन लागत बहुत कम है।

अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन के साथ इंटरव्यू में यूनुस ने दावा किया था कि- ‘अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ के कारण भारतीय उद्योग भारत छोड़कर बांग्लादेश का रुख करेंगे। भारत पर अमेरिका के टैरिफ ज्यादा हैं, जबकि बांग्लादेश को कम टैरिफ मिला है जिससे भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में अपनी फैक्ट्रियां लगाएंगी।’ लेकिन आज की हकीकत ये है कि बांग्लादेश की खुद की कपड़े मिलें बंद होने की कगार पर हैं।

 

घरेलू कपड़ा उद्योग बंद होने की कगार
जनवरी 2026 के अंत में बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। एक ओर अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस भारत पर अमेरिकी टैरिफ के बहाने तंज कस रहे थे, तो दूसरी ओर देश का अपना घरेलू कपड़ा उद्योग बंद होने की कगार पर है। बांग्लादेश का जमीनी हकीकत काफी चिंताजनक है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) ने घोषणा की है कि 1 फरवरी 2026 से देश की सभी टेक्सटाइल मिलें अनिश्चित काल के लिए बंद कर दी जाएंगी।

BTMA के अध्यक्ष शौकत अजीज रसेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि मिल मालिकों के पास बैंक लोन चुकाने की क्षमता नहीं बची है। उनकी पूंजी 50% से ज्यादा घट चुकी है, और कई मिलें पहले ही बंद हो चुकी हैं। बांग्लादेशी मिलों का आरोप है कि भारत से आने वाले सस्ते सूत ने घरेलू बाजार को तबाह कर दिया है। लगभग 12,000 करोड़ टका का स्थानीय स्टॉक बिना बिका पड़ा है। गैस की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण उत्पादन क्षमता 50% तक गिर गई है। BTMA की मांग है कि सरकार 10-30 काउंट के सूत के आयात पर ड्यूटी-फ्री सुविधा वापस ले और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करे।

भारत-ईयू (EU) डील: बांग्लादेश के लिए खतरे की घंटी
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को मदर ऑफ ऑल डील्स कहा जा रहा है। यह बांग्लादेश के गारमेंट एक्सपोर्ट के लिए सबसे बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। वर्तमान में बांग्लादेश LDC (अल्प विकसित देश) होने के नाते EU में ड्यूटी-फ्री एक्सेस पाता है, जबकि भारत को 12% टैक्स देना पड़ता है।

इस डील के बाद भारत को भी 0% टैरिफ मिलेगा। भारत के पास खुद का कच्चा माल (कपास और सूत) है। ड्यूटी हटते ही भारतीय कपड़े बांग्लादेशी कपड़ों की तुलना में सस्ते और बेहतर गुणवत्ता वाले हो जाएंगे। बांग्लादेश 2026-27 तक LDC श्रेणी से बाहर हो जाएगा, जिससे उसका खुद का ड्यूटी-फ्री कोटा खत्म हो जाएगा। ऐसे में भारत के साथ मुकाबला करना लगभग असंभव होगा। यूरोपीय संघ में हर तीसरा व्यक्ति बांग्लादेशी डेनिम पहनता है। डील के बाद भारत इस बाजार का एक बड़ा हिस्सा कब्जा सकता है।

मोहम्मद यूनुस जहां एक तरफ भारतीय कंपनियों के बांग्लादेश आने की उम्मीद जता रहे थे, वहीं हकीकत यह है कि बांग्लादेश का अपना ‘बैकवर्ड लिंकेज’ (सूत और कपड़ा बनाने वाली मिलें) बंद हो रहा है।

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