वॉशिंगटन. अमेरिका (US) ने भारत (India) से कहा है कि वह जल्द ही वेनेजुएला (Venezuela) से कच्चा तेल (Crude oil) खरीदना दोबारा शुरू कर सकता है. रॉयटर्स से बात करने वाले मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका इस सप्लाई को रूसी तेल के विकल्प के तौर पर पेश कर रहा है, क्योंकि भारत रूसी तेल का आयात तेजी से घटाने जा रहा है.
यह पहल ऐसे समय पर हुई है, जब वॉशिंगटन की ओर से रूसी तेल आयात से जुड़े टैरिफ बढ़ाने के बाद भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में बड़ी कटौती का वादा किया है. सूत्रों के अनुसार, आने वाले महीनों में भारत रूसी तेल का आयात कई लाख बैरल प्रतिदिन तक घटाने की तैयारी में है.
वेनेजुएला से तेल खरीदने वालों पर लगा दिया था टैरिफ
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मार्च 2025 में वेनेजुएला का तेल खरीदने वाले देशों, जिनमें भारत भी शामिल है, पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाया था. इसके साथ ही उनकी सरकार ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ अभियान तेज किया था, जिन्हें 3 जनवरी को अमेरिकी बलों ने पकड़ लिया था.
लेकिन कौन बेचेगा वेनेजुएला का तेल?
इसके बाद अमेरिका के रुख में बदलाव के संकेत मिले. वॉशिंगटन ने नई दिल्ली से कहा कि वह रूसी सप्लाई में कमी की भरपाई के लिए वेनेजुएला से तेल खरीद फिर शुरू कर सकता है. यह कदम रूस के तेल निर्यात से होने वाली आय को सीमित करने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है, जिससे यूक्रेन युद्ध को फंडिंग मिल रही है. सूत्रों ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वेनेजुएला का तेल किसी निजी ट्रेडिंग कंपनियों के जरिए बेचा जाएगा या सीधे वहां की सरकारी तेल कंपनी के माध्यम से.
‘कच्चे तेल के स्रोतों में लाएंगे विविधता’
यूक्रेन पर 2022 में रूस के हमले के बाद पश्चिमी प्रतिबंधों और भारी छूट के चलते भारत रूस का बड़ा तेल खरीदार बन गया था. हालांकि बाद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा दिए. रूसी तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ जोड़ने के बाद अगस्त तक ये टैरिफ 50 प्रतिशत तक पहुंच गए. पिछले हफ्ते तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि रूसी तेल का आयात घटाने के साथ भारत अपने कच्चे तेल के स्रोतों में विविधता ला रहा है. उन्होंने वेनेजुएला को लेकर सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा.
5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिर सकता है आयातरॉयटर्स के दो सूत्रों के मुताबिक, भारत जल्द ही रूसी तेल आयात को 10 लाख बैरल प्रतिदिन से नीचे लाने की तैयारी में है. जनवरी में यह करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन था. फरवरी में इसके 10 लाख बैरल और मार्च में करीब 8 लाख बैरल प्रतिदिन तक गिरने का अनुमान है. एक अन्य सूत्र ने कहा कि आगे चलकर यह मात्रा 5 से 6 लाख बैरल प्रतिदिन तक भी आ सकती है. ऐसा होने से भारत को अमेरिका के साथ व्यापक व्यापार समझौता करने में मदद मिल सकती है.
व्यापार से जुड़े आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर में भारत का रूसी तेल आयात पिछले दो साल के सबसे निचले स्तर पर आ गया. इससे भारत के आयात में ओपेक देशों के तेल की हिस्सेदारी 11 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई. भारतीय रिफाइनरियों ने कमी पूरी करने के लिए मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका से तेल की खरीद बढ़ा दी है.
———————–
📝 Disclaimer
The content of this post is not originally published by us. The news and information provided here are sourced from trusted online sources, including NewsOnline.co.in
. We share this content only for informational and educational purposes. All rights to the original content belong to their respective owners. If you are the original author or copyright holder and wish to have this content removed or modified, please contact us, and we will take immediate action.


