पीएम तारिक रहमान ने आर्मी चीफ जनरल वकर-उज-जमां की ‘कमान’ बहाल की

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ढाका। बांग्लादेश की राजनीति में फरवरी महीना बड़े बदलाव लेकर आया है। 18 महीने के अंतरिम शासन के बाद तारिक रहमान के नेतृत्व में पूर्ण राजनीतिक सरकार के गठन के साथ सत्ता समीकरण बदल गए हैं। इसका सीधा असर सेना पर भी पड़ा है। सेना प्रमुख जनरल वकार-उज-जमां की ‘कमान’ एक बार फिर मजबूत होती दिख रही है।
सूत्रों के अनुसार, अंतरिम सरकार के दौरान सेना पर जो निगरानी और नियंत्रण तंत्र लागू किया गया था, वह अब समाप्त कर दिया गया है। पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) सचिवालय के माध्यम से सेना के निर्णयों पर ओवरसाइट रखी जा रही थी। अंतरिम शासन का नेतृत्व कर रहे मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल में यह व्यवस्था लागू की गई थी, जिससे सेना मुख्यालय के कई फैसले प्रभावित हुए थे।
दो बड़ी बाधाएं हुईं दूर
जानकारी के मुताबिक, जनरल जमां के पूर्ण अधिकार में दो प्रमुख बाधाएं थीं पहली, राजनीतिक सरकार का अभाव और दूसरी, एनएसए सचिवालय के जरिए सैन्य मामलों में दखल। अब पूर्ण सरकार बनने और निगरानी तंत्र हटने के बाद सेना प्रमुख को राहत मिली है। पूर्व एनएसए और वर्तमान विदेश मंत्री खलिलुर रहमान पर आरोप था कि उन्होंने सैन्य मामलों में गहरी दखलंदाजी की। कई मौकों पर आर्मी मुख्यालय के फैसलों को एनएसए कार्यालय से पलट दिया गया। इससे सेना के भीतर असंतोष की स्थिति बनी रही।
सेना में बड़े फेरबदल
हालिया घटनाक्रम के बाद सेना के शीर्ष पदों पर बदलाव किए गए हैं। जनरल जमां के भरोसेमंद लेफ्टिनेंट जनरल मैनुर्रहमान को चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (सीजीएस) नियुक्त किया गया है। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल कमरुल हसन को विदेश मंत्रालय में राजनयिक भूमिका सौंपी गई है। ब्रिगेडियर कैसर राशिद को पदोन्नत कर मेजर जनरल बनाया गया और उन्हें डीजीएफआई का महानिदेशक नियुक्त किया गया है।
विश्लेषकों का कहना है कि इन बदलावों से सेना के भीतर कथित ‘जमातीकरण’ में कमी आई है और पेशेवर ढांचे को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा है। जनरल जमां लंबे समय से सेना को एक पेशेवर और राजनीतिक प्रभाव से मुक्त बल के रूप में स्थापित करने की वकालत करते रहे हैं।
बैरकों में वापसी की तैयारी
अंतरिम शासन के दौरान कानून-व्यवस्था संभालने के लिए सेना को सड़कों पर उतारा गया था। अब नई सरकार बनने के बाद उम्मीद है कि सेना धीरे-धीरे बैरकों में लौटेगी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सैनिकों की तैनाती जारी रह सकती है।

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