तालिबान के सुप्रीम लीडर अखुंदजादा को निशाना बनाकर पाकिस्तान ने की घातक एयरस्ट्राइक

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काबुल। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच जारी सीमा विवाद अब एक खतरनाक और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। हालिया सुरक्षा रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है कि पाकिस्तान वायुसेना ने कंधार के कैंप गेको में एक बेहद सटीक और बड़ा हवाई हमला किया है। इस हमले का मुख्य उद्देश्य अफगान तालिबान के सर्वोच्च नेता हैबतुल्लाह अखुंदजादा को निशाना बनाना था। यदि यह दावा पूरी तरह पुष्ट होता है, तो इसे केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की भू-राजनीति को हिला देने वाली घटना माना जाएगा।
यह भीषण हमला शुक्रवार तड़के उस समय किया गया, जब खुफिया सूचनाओं के आधार पर यह संकेत मिले थे कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा पिछले कुछ हफ्तों से कैंप गेको के एक अत्यंत सुरक्षित परिसर में ठहरे हुए हैं। जमीनी स्तर से आ रही शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस एयरस्ट्राइक में कम से कम 22 लोगों के मारे जाने और 50 से अधिक के घायल होने की सूचना है। कंधार, जिसे तालिबान नेतृत्व का आध्यात्मिक और संचालन केंद्र माना जाता है, पिछले 48 घंटों से भारी तनाव और सुरक्षा घेरे में है। इस हमले की तुलना उन चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय अभियानों से की जा रही है, जिनमें किसी देश ने सीधे तौर पर दूसरे देश के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने की कोशिश की हो।
हालांकि, सबसे बड़ा सवाल अभी भी अखुंदजादा की स्थिति को लेकर बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, हवाई हमले ने कैंप गेको की बाहरी सुरक्षा परतों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है, लेकिन तालिबान के सुप्रीम लीडर की वर्तमान स्थिति अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि हैबतुल्लाह अखुंदजादा एक अत्यंत गुप्त और बहुस्तरीय सुरक्षा घेरे में रहते हैं। रिपोर्टों में यह भी उल्लेख है कि उनके लिए विशेष रूप से जमीन के नीचे ऐसे बंकरों का निर्माण किया गया है, जो भारी हवाई हमलों को सहने में सक्षम हैं। यही कारण है कि ऊपरी इमारतों के तबाह होने के बावजूद उनके बचने की संभावना बनी हुई है। मारे गए 22 लोगों के बारे में माना जा रहा है कि वे तालिबान के उस विशिष्ट आंतरिक सुरक्षा दस्ते का हिस्सा थे, जो सुप्रीम लीडर के सबसे करीबी रक्षा कवच के रूप में तैनात रहते हैं। यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि पाकिस्तान की यह कार्रवाई केवल एक संदेश देने के लिए नहीं, बल्कि सीधे तौर पर नेतृत्व को खत्म करने के लिए की गई थी। इस स्ट्राइक को हाल के वर्षों में पाकिस्तान की ओर से की गई अब तक की सबसे घातक और सीधी सैन्य कार्रवाई बताया जा रहा है। आने वाले दिनों में इस घटना के प्रतिशोध में तालिबान की प्रतिक्रिया पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति तय करेगी।

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