चीन के बाद उत्तर कोरिया ने भी दिखाई न्यूक्लियर पावर, परमाणु-संचालित पनडुब्बी का प्रदर्शन

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प्योंगयांग,। उत्तर कोरिया के पास पहले से ही दुनिया के सबसे बड़े पनडुब्बी बेड़ों में से एक है, लेकिन वे ज्यादातर पुरानी और शोर करने वाली डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं। डीजल पनडुब्बियों को अपनी बैटरी चार्ज करने के लिए बार-बार सतह पर आना पड़ता है, जिससे वे रडार की पकड़ में आ जाती हैं। परमाणु पनडुब्बी तब तक पानी के नीचे रह सकती है जब तक चालक दल के लिए भोजन समाप्त न हो जाए। परमाणु पनडुब्बियां पानी के भीतर डीजल पनडुब्बियों की तुलना में काफी तेज गति से चल सकती हैं, जिससे वे दुश्मन के युद्धपोतों से आसानी से बच सकती हैं।
उत्तर कोरिया के लिए परमाणु पनडुब्बी का सबसे बड़ा लाभ अजेयता है। यदि अमेरिका या दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया के जमीनी मिसाइल साइलो को नष्ट भी कर दें, तब समुद्र में छिपी यह पनडुब्बी जवाबी हमला करने के लिए सुरक्षित रहेगी। यह म्युचुअली एश्योर्ड डिस्ट्रक्शन (एमडीए) की स्थिति पैदा करता है, जिससे कोई भी पक्ष युद्ध शुरू करने से डरेगा। उत्तर कोरिया ने रूस को लाखों आर्टिलरी गोले और ह्वासोंग-11 मिसाइलें प्रदान की हैं।
परमाणु रिएक्टर को एक पनडुब्बी के छोटे से हिस्से में फिट करना बहुत ही जटिल इंजीनियरिंग है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस ने मिनिएचराइजेशन और साइलेंसिंग तकनीक (शोर कम करने की तकनीक) साझा की होगी, जो उत्तर कोरिया के पास पहले नहीं थी। यह पनडुब्बी अभी भी निर्माण के चरण में है। वास्तविक चुनौती इसका समुद्री परीक्षण होगा, जहाँ यह देखा जाएगा कि क्या इसका रिएक्टर सुरक्षित रूप से काम करता है और क्या यह बिना पता चले गहरे पानी में गोता लगा सकती है।
किम जोंग उन ने इस पनडुब्बी को युगांतकारी बताया है। उनका मानना है कि यह तकनीक दुश्मन देशों (मुख्यतः अमेरिका और दक्षिण कोरिया) के खिलाफ उनकी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। पनडुब्बी के हल का पूरा दिखना और उस पर एंटी-कोरोसिव पेंट (जंग-रोधी परत) का होना यह दर्शाता है कि आंतरिक मशीनरी, जैसे रिएक्टर और इंजन, संभवतः स्थापित किए जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जहाज अगले कुछ महीनों में समुद्री परीक्षणों के लिए तैयार हो सकता है।
यह चिंता का विषय क्यों है?
परमाणु-संचालित पनडुब्बियां सामान्य डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक होती हैं क्योंकि ये हफ्तों तक पानी के भीतर रह सकती हैं, जिससे दुश्मन के रडार और उपग्रहों के लिए इन्हें ट्रैक करना लगभग असंभव हो जाता है। यदि उत्तर कोरिया पर जमीनी हमला होता है, तो ये पनडुब्बियां समुद्र के भीतर छिपी रहकर जवाबी परमाणु हमला करने में सक्षम होंगी। यह पनडुब्बी किम जोंग के उन पांच प्रमुख सैन्य लक्ष्यों में से एक है, जिसमें हाइपरसोनिक मिसाइलें और जासूसी उपग्रह भी शामिल हैं।
भले ही तस्वीरें प्रभावशाली दिख रही हों, लेकिन कुछ बड़े सवाल अभी भी बने हुए हैं
कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया ने परमाणु रिएक्टर को छोटा करने और उसे पनडुब्बी में फिट करने की तकनीक कहाँ से हासिल की? परमाणु पनडुब्बियों को बहुत शांत होना चाहिए। यदि यह पनडुब्बी शोर करती है, तो इसे आधुनिक सोनार सिस्टम से आसानी से पकड़ा जा सकेगा। कई रक्षा विश्लेषकों का संदेह है कि हाल के महीनों में रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ती नजदीकी के कारण, रूस ने इस परियोजना में तकनीकी मदद दी हो सकती है।

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