आंध्र प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 3.32 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बजट पेश किया। इसमें कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया गया है। राज्य विधानसभा में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री पय्यावुला केशव ने बताया कि अनुमानित राजस्व व्यय 2.56 लाख करोड़ रुपये और पूंजीगत व्यय करीब 54,000 करोड़ रुपये रखा गया है।वित्त मंत्री के अनुसार, राज्य का अनुमानित राजस्व घाटा करीब 22,000 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 1.11 प्रतिशत) रहने का अनुमान है।वहीं राजकोषीय घाटा लगभग 76,000 करोड़ रुपये (जीएसडीपी का 3.84 प्रतिशत) आंका गया है।
बजट में पिछड़ा वर्ग (BC) घटक के लिए 51,021 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।वहीं, स्कूल शिक्षा विभाग को 32,308 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।स्वास्थ्य, चिकित्सा व परिवार कल्याण विभाग के लिए 19,306 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
पंचायती राज व ग्रामीण विकास विभाग को क्या मिला?
इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण के पास मौजूद पंचायती राज व ग्रामीण विकास विभाग को लगभग 23,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है, जो ग्रामीण बुनियादी ढांचे और स्थानीय विकास को मजबूत करने पर सरकार के फोकस को दर्शाता है।राज्य को निर्माण के लिए दो वर्ष का समय पर्याप्त नहीं बजट भाषण में केशव ने कहा कि राज्य को पुनर्निर्माण के लिए दो वर्ष का समय पर्याप्त नहीं है, क्योंकि राज्य ने अपने गठन के बाद कई गंभीर चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने 2014 के विभाजन को अतार्किक बताते हुए कहा कि इससे राज्य एक मजबूत राजधानी, विकास के प्रमुख इंजन और राजस्व देने वाले सेवाक्षेत्र से वंचित हो गया। उन्होंने 2019-24 के शासनकाल को नीतिगत ठहराव और वित्तीय लापरवाही का दौर बताते हुए कहा कि इससे राज्य की आर्थिक स्थिति और प्रभावित हुई।वित्त मंत्री ने बजट को केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि पांच करोड़ लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने का एक रोडमैप बताया, जिसमें सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी गई है।
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