व्यापार: देश में विमानन कंपनियां इस साल 26 अक्तूबर से शुरू हो रहे शीतकालीन कार्यक्रम में हर सप्ताह 26,495 उड़ानें संचालित करेंगी, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत अधिक है। यह शीतकालीन शेड्यूल 26 अक्तूबर से शुरू होकर 28 मार्च 2026 तक लागू रहेगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुसार, इन उड़ानों से 126 हवाईअड्डों को जोड़ा जाएगा। पिछले ग्रीष्मकालीन शेड्यूल-25 में 129 हवाई अड्डों से 25,610 उड़ानें संचालित हो रही थीं। अमरावती, हिसार, पूर्णिया और रुपसी नए हवाई अड्डों के रूप में शामिल किए हैं।
IMF का अनुमान- इस साल 6.6 फीसदी की दर से बढ़ेगी भारत की अर्थव्यवस्था
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) का पूर्वानुमान है कि भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 6.6% की दर से बढ़ेगी। विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) की रिपोर्ट के अनुसार IMF ने कहा है कि भारत सबसे तेजी से बढ़ते 'उभरते बाजार और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं' में से एक बना रहेगा। पहली तिमाही में मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के कारण भारत की स्थिति बेहतर हुई है। भारतीय वस्तुओं पर बढ़े हुए अमेरिकी टैरिफ का असर भी काफी हद तक संतुलित हो गया है। आईएमएफ का अनुमान है कि भारत चीन से आगे निकलने वाला है। चीन का विकास दर 4.8% रहने का अनुमान है। हालांकि, आईएमएफ ने पहली तिमाही की गति मंद पड़ने का हवाला देते हुए 2026 के लिए अपने अनुमान को घटाकर 6.2% कर दिया है। टैरिफ का कम असर होने का उल्लेख करते हुए आईएमएफ ने 2025 में वैश्विक विकास दर 3.2% रहने का अनुमान लगाया है।
कमजोर मांग से निजी क्षेत्र की वृद्धि दर घटकर पांच महीने में सबसे कम
कमजोर मांग और उत्पादन की बढ़ती कीमतों के कारण निजी क्षेत्र की वृद्धि दर अक्तूबर में घटकर पांच महीने के निचले स्तर पर आ गई। एचएसबीसी का फ्लैश इंडिया कंपोजिट खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) अक्तूबर में गिरकर 59.9 पर आ गया। सितंबर में यह 61.0 पर था। हालांकि, मई के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंचने के बावजूद वृद्धि दर मजबूत रही। मौसमी रूप से समायोजित सूचकांक विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों के संयुक्त उत्पादन में मासिक आधार पर बदलाव को मापता है। रिपोर्ट के अनुसार, अक्तूबर में वृद्धि दर में गिरावट मुख्य रूप से सेवाओं की वृद्धि में मंदी के कारण रही। विनिर्माण गतिविधि सितंबर में चार महीने के निचले स्तर से उबर गई। विनिर्माण पीएमआई सितंबर के 57.7 से बढ़कर 58.4 हो गया। सेवा व्यवसाय गतिविधि सूचकांक 60.9 से घटकर 58.8 हो गया। नए ऑर्डर सूचकांक में मजबूती से वृद्धि हुई। हालांकि, मई के बाद से यह सबसे कम गति पर था। विनिर्माण निर्यात में धीमी वृद्धि के कारण वस्तुओं-सेवाओं की वैश्विक मांग सात महीनों में सबसे कम रही।
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