भारत ने सेशेल्स के लिए खोला खजाना, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मिलेगी नई रफ्तार

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भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदार देश सेशेल्स के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच सोमवार को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता में विकास से जुड़ी साझेदारी को केंद्र में रखा गया। इस दौरान दोनों नेताओं ने 'सेशेल' विजन को अपनाया, जिसका मकसद स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। भारत ने सेशेल्स की विकास से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की है, जो वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक हाउसिंग सेक्टर को मजबूती देगा। सेशेल विजन और विशेष आर्थिक पैकेज इस उच्च स्तरीय बैठक का सबसे अहम दस्तावेज रहा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस विजन के तहत भारत ने सेशेल्स के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज का एलान किया है। यह फंड मुख्य रूप से पब्लिक हाउसिंग, मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी ने इस बात पर जोर दिया कि यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

ब्लू इकोनॉमी से लेकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक समझौते 

हैदराबाद हाउस में हुई इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने कई अहम समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। इनमें स्वास्थ्य, डिजिटल सहयोग, मौसम विज्ञान, संस्कृति, महासागर विज्ञान, खाद्य सुरक्षा और गवर्नेंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों नेताओं ने ब्लू इकोनॉमी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सेक्टर्स में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। सेशेल्स की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन और समुद्री संसाधन बेहद अहम हैं, ऐसे में भारत का सहयोग वहां की अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान करने में मदद करेगा।

विजन 'सागर' और रणनीतिक महत्व

बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे। सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के 'विजन सागर' का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि एक समुद्री पड़ोसी के रूप में, सेशेल्स का समर्थन इस क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा के लिए बेहद मूल्यवान है। समुद्री सुरक्षा पर हुई चर्चा इस बात का संकेत है कि भारत हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है।

मुंबई और चेन्नई में निवेश पर चर्चा

राष्ट्रपति हर्मिनी का यह दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से बिजनेस सेंट्रिक भी रहा है। दिल्ली पहुंचने से पहले उन्होंने चेन्नई और मुंबई में समय बिताया, जहां उन्होंने गवर्नेंस, इंडस्ट्री और कोस्टल मैनेजमेंट से जुड़े प्रमुख स्टेकहोल्डर्स के साथ मुलाकात की। पिछले साल अक्तूबर में पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जो पांच दिनों तक चलेगा। रविवार को दिल्ली पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया था और सोमवार को उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

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