भारत की सबसे बड़ी म्यूचुअल फंड कंपनी, एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, अपने आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) के लिए फरवरी के मध्य तक अपना ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल कर सकती है। कंपनी के अप्रैल तक शेयर मार्केट में लिस्ट होने की उम्मीद है। एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और फ्रांसीसी एसेट मैनेजर अमुंदी की संयुक्त उपक्रम है। आईपीओ में, एसबीआई अपनी 6.3% हिस्सेदारी और अमुंदी अपनी 3.7% हिस्सेदारी बेचेगी। इस तरह कुल 10% हिस्सेदारी की बिक्री होगी।
कंपनी का साइज और वैल्युएशन
कंपनी के पास 31 दिसंबर तक 12.5 लाख करोड़ रुपये की औसत संपत्ति प्रबंधन में थी। वित्त वर्ष 2025 में इसका शुद्ध लाभ 2,531 करोड़ रुपये रहा। निवेश बैंकरों ने कंपनी का मूल्य 12 से 14 अरब डॉलर आंका है और 1.2 से 1.4 अरब डॉलर के आईपीओ का सुझाव दिया है।
आईपीओ प्रॉसेस
लक्ष्य फरवरी के मध्य या तीसरे सप्ताह तक ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस दाखिल करने का है, ताकि अप्रैल में आईपीओ ओपन हो सके। हालांकि, यह बाजार की स्थितियों और भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) की मंजूरी पर निर्भर करेगा, जिसमें आमतौर पर दो से तीन महीने लगते हैं।
मूल्यांकन पर चर्चा और बैंकर
विभिन्न निवेश बैंकोंने अलग-अलग मूल्यांकन पेश किए हैं। अंतिम मूल्यांकन दाखिल करने के समय के करीब तय किया जाएगा। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स, कोटक महिंद्रा कैपिटल, एक्सिस बैंक सहित नौ बैंकों को इस आईपीओ का प्रबंधन सौंपा गया है। पहले सिटिग्रुप और जेपी मॉर्गन जैसे कुछ बड़े बैंक शुल्क को लेकर मतभेद के चलते इस सौदे से अलग हो गए थे।
भारतीय आईपीओ मार्केट का क्या है माहौल
भारतीय आईपीओ बाजार गर्म है। वर्ष 2025 में 103 कंपनियों ने 1.76 लाख करोड़ रुपये जुटाए। इसी तरह, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट का 1.2 अरब डॉलर का आईपीओ पिछले महीने आया था और केनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट अक्टूबर में सूचीबद्ध हुई थी। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से उनकी सहायक कंपनियों को सूचीबद्ध करने के लिए कहा गया है।
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