नई दिल्ली/ढाका : बांग्लादेश में अफरा-तफरी का माहौल जारी है. अल्पसंख्यक हिंदुओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. बांग्लादेश के सिलहट में प्रमुख युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बढ़े तनाव के मद्देनजर भारतीय सहायक उच्चायोग कार्यालय और वीजा आवेदन केंद्र पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है.
ढाका ट्रिब्यून अखबार के अनुसार, सिलहट मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अतिरिक्त उपायुक्त (मीडिया) सैफुल इस्लाम ने कहा कि सुरक्षा के कड़े उपाय इसलिए किए गए हैं ताकि कोई तीसरा पक्ष स्थिति का फायदा न उठा सके. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने कहा कि एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या किए जाने के मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. मैमेनसिंह शहर में गुरुवार को कथित ईशनिंदा को लेकर भीड़ ने दीपू चंद्र दास (25) की पीटकर हत्या कर दी थी और शव को आग लगा दी थी.
जिन लोगों को मामले में आरोपी बनाया गया है, उसमें मोहम्मद लिमोन सरकार (19), मोहम्मद तारेक हुसैन (19), मोहम्मद मानिक मिया (20), इरशाद अली (39), निजुम उद्दीन (20), आलमगीर हुसैन (38) और मोहम्मद मिराज हुसैन अकोन (46) शामिल हैं. इसके अलावा मोहम्मद अजमोल हसन सगीर (26), मोहम्मद शाहिन मिया (19) और मोहम्मद नजमुल को भी पुलिस ने हिरासत में रखा है. इन सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है.
बांग्लादेश पुलिस ने बताया कि मजदूरी करने वाले दास को पहले भीड़ ने ईशनिंदा के आरोपों में फैक्टरी के बाहर पीटा और फिर पेड़ से टांग दिया. उन्होंने कहा कि भीड़ ने मृतक के शव को ढाका-मैमेनसिंह राजमार्ग के किनारे छोड़ दिया और बाद में उसमें आग लगा दी.
बांग्लादेश में हर रोज बिगड़ते हालात को लेकर बांग्लादेश स्थित हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद ने चिंता जताई है. संगठन ने सरकार से अपील की है कि वे जल्द से जल्द सख्त कदम उठाए और अल्पसंख्यकों को भरोसे में ले. उन्होंने इस मामले में दोषियों के खिलाफ अविलंब कार्रवाई की भी मांग की है. संगठन ने कहा कि इस मामले के जरिए दोषियों ने सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश की है.
अमेरिका में भारत की राजदूत रह चुकीं निरुपमा राव ने सोशल मीडिए एक्स पर अपने पोस्ट में पश्चिमी देशों को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने लिखा कि शेख हसीना के विदेशी विरोधियों ने उन्हें संकीर्ण दृष्टिकोण से देखा. इन देशों ने बांग्लादेश की परिस्थिति को झुठलाकर पश्चिमी लोकतांत्रिक मानकों पर उनके शासन को उतारा. उनके अनुसार लंबे समय तक सत्ता में बने रहना, केंद्रीकृत शक्ति, मानवाधिकार रिपोर्टें ये सब हसीना के खिलाफ था. राव ने अपने पोस्ट में लिखा कि बांग्लादेश का आकलन ऐसे किया गया मानो वह डेनमार्क हो, जहां मतदान में समस्या हो, न कि एक नाजुक, घनी आबादी वाला राज्य जिसका हिंसक इस्लामी इतिहास और आघातग्रस्त राजनीतिक संस्कृति हो. उन्होंने कहा कि शेख हसीना चाहे जैसी भी हों, उन्होंने जमात और अन्य भारत विरोधी ताकतों को काबू में रखा था.
बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या किए जाने पर, अखिल भारतीय इमाम संगठन के मुख्य इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इल्यासी ने कहा, "मानवता कलंकित हुई है. यह मानवता की हत्या है. जिस क्रूरता से बच्चे की हत्या की गई और उसकी मृत्यु के बाद उसके साथ जो किया गया, उसे पेड़ से लटकाना, सरासर गलत है. जिन बांग्लादेशियों की भारत ने हमेशा मदद की है, ये कृतघ्न बांग्लादेशी भूल गए हैं कि भारत हर तरह से उनके साथ खड़ा रहा है. वे मानवाधिकार संगठन कहां हैं? वे आज आवाज क्यों नहीं उठा रहे हैं? यह किस तरह की इस्लामी शिक्षा है कि वे इस तरह की हत्याएं कर रहे हैं? ये इस्लाम के अनुयायी नहीं हो सकते. प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को हस्तक्षेप करना चाहिए."
ढाका ट्रिब्यून के संपादक रियाज अहमद ने उस्मान हादी की मौत पर बांग्लादेश में भड़की व्यापक हिंसा पर टिप्पणी करते हुए कहा, "इस घटना को बहाना बनाकर, शोक और संवेदना व्यक्त करने वाली विशाल भीड़ में से कुछ असंबद्ध तत्वों ने अत्यधिक हिंसा का सहारा लिया. यदि सरकार ने पहले से ही निवारक उपाय किए होते तो स्थिति को बेहतर ढंग से संभाला जा सकता था. हमने एक राष्ट्र के रूप में एक बहुत बुरा उदाहरण पेश किया है. राज्य को इसे बर्दाश्त नहीं करना चाहिए."
बांग्लादेश की स्थिति पर आरजेडी सांसद मनोज झा कहते हैं, "बांग्लादेश में घटित घटनाएँ चिंताजनक हैं। वहां तख्तापलट होने के बाद भी हमने कहा था कि हमें घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखनी चाहिए. मैं लगभग स्तब्ध हूं. जिस तरह से हालात सामने आए हैं, दक्षिण एशिया के इस क्षेत्र पर बहुत सावधानीपूर्वक और गंभीरता से नज़र रखने की ज़रूरत है, और मैं अपनी सरकार से कुछ सक्रिय कदम उठाने की अपेक्षा करता हूं और आग्रह करता हूं."
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