वाशिंगटन,। अमेरिका और इजराइल के हमलों के बीच ईरान के कई शहरों में भारी तबाही की खबरें सामने आ रही हैं। इसी बीच एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरी दुनिया को झकझोर दिया है। दक्षिणी ईरान के मिनाब शहर में एक प्राथमिक स्कूल पर बमबारी हुई। इस हमले में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हुई। शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि यह हमला उस दिन हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की थी। हमले की भयावह तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद दुनिया भर में इसका विरोध हुआ। कई देशों और मानवाधिकार संगठनों ने सवाल उठाए कि आखिर बच्चियों के स्कूल तक जंग क्यों पहुंची।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जब इस हमले को लेकर सवाल पूछा गया तो उनका जवाब भी विवादों में घिर गया। उन्होंने तुरंत जवाब दिया कि जो जानकारी उन्होंने देखी है उसके मुताबिक यह हमला ईरान ने खुद किया है। हालांकि शुरुआती जांच और कुछ अमेरिकी अधिकारियों के बयान इस दावे से अलग कहानी बताते हैं। यही वजह है कि ट्रंप के बयान पर अब सवाल उठ रहे हैं और आलोचक कह रहे हैं कि जंग के बीच सच को छिपाने की कोशिश की जा रही है। इस हमले में कम से कम 168 लोगों की मौत हुई थी। इनमें बड़ी संख्या में बच्चियां शामिल थीं। शुरुआती संकेत मिले कि हमले में इस्तेमाल किया गया हथियार अमेरिकी हो सकता है। हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने आधिकारिक तौर पर इसकी जिम्मेदारी लेने से इनकार किया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने बंद कमरे में हुई बैठक में सांसदों को बताया कि हमले के समय अमेरिकी सेना उसी इलाके में ऑपरेशन चला रही थी जहां यह स्कूल है। वहीं यह भी कहा गया कि इस हमले में इजराइल की कोई भूमिका नहीं थी। फिलहाल इस पूरे मामले की जांच जारी है और अंतिम रिपोर्ट आने का इंतजार किया जा रहा है। इस विवाद के बीच एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब ब्रिटेन ने मध्य पूर्व में अपने विमानवाहक पोत को तैनात करने की तैयारी दिखाई। ब्रिटेन की रॉयल नेवी का एचएमएस प्रिंस ऑफ वेल्स कैरियर इस मिशन के लिए तैयार किया जा रहा था, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिका को इस जंग में ब्रिटेन की मदद की जरूरत नहीं। उन्होंने कहा कि अगर मदद करनी थी तो दो हफ्ते पहले करते अब इसकी जरूरत नहीं है।
बता दें इस हमले को लेकर जांच जारी है और अमेरिकी प्रशासन भी आंतरिक जांच कर रहा है। शुरुआती संकेतों में कहा गया है कि हमले में अमेरिकी हथियार का इस्तेमाल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अगर जांच में यह साबित होता है तो यह अमेरिका के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती बन सकता है। दूसरी ओर ईरान भी इस घटना को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की तैयारी कर रहा है।
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