रुपए में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है. शुक्रवार को भी रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले एक और ऐतिहासिक निचले स्तर 90.41 पर बंद हुआ, जो दूसरा रिकॉर्ड निचला स्तर है. शुरुआती कारोबार में घरेलू मुद्रा अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.55 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गई थी, जिसका मुख्य कारण अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में देरी है |
आंकड़ों पर बात करें तो भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.31 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर खुला. कारोबारी सत्र के दौरान रुपया और कमजोर हुआ और 90.55 के नए निचले स्तर पर पहुंच गया | दोपहर के सत्र में रुपए में मामूली सुधार देखने को मिला और 90.37 पर पहुंच गया. बाजार बंद होने तक रुपया 90.41 के नए ऐतिहासिक निचले स्तर पर बंद हुई |
ये हैं रुपए के तीन दुश्मन
अमेरिका के साथ ट्रेड डील में देरी
हालांकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में द्विपक्षीय सहयोग पर बात की, लेकिन टैरिफ में किसी भी तरह की राहत का कोई ठोस संकेत नहीं मिला. विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा टैरिफ लगाए जाने के बाद से ही रुपये पर दबाव बना हुआ है और इसका असर साल के अंत तक दिखने लगेगा. बाजार अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की अंतिम तिथि का इंतजार कर रहे हैं. विश्लेषकों का कहना है कि रुपए की मजबूती अब इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत सरकार अमेरिका के साथ अंतिम व्यापार समझौते की घोषणा कब करती है |
विदेशी निवेशकों की मुनाफावसूली
विदेशी निवेशकों द्वारा घरेलू शेयरों की लगातार बिक्री से घरेलू करेंसी पर दबाव बढ़ रहा है. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार से 18 अरब डॉलर मूल्य के शेयर निकाले हैं. अगर बात मौजूदा महीने की करें तो करीब 18 हजार करोड़ रुपए की बिकवाली कर चुके हैं | दिसंबर मौजूदा साल का 8वां महीना है जब विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं. सिर्फ चार ही महीने ऐसे देखने को मिले जब निवेशकों ने पैसा शेयर बाजार में डाला. जबकि बीते 15 महीनों में से 10 महीनों में विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से अपना पैसा निकाला है. इस दौरान डॉलर के मुकाबले में रुपया करीब 8 फीसदी तक टूट चुका है |
डॉलर की जमकर हो रही है खरीदारी
स्थानीय कंपनियां अपने साल के अंत के भुगतान पूरे करने के लिए डॉलर की भारी खरीद कर रही हैं, जिससे मुद्रा और कमजोर हो गई है. व्यापारियों का कहना है कि आरबीआई ने हस्तक्षेप किया है, लेकिन केंद्रीय बैंक ने करेंसी के लिए कोई विशिष्ट लक्ष्य लेवल निर्धारित नहीं किया है | वैसे 16 दिसंबर को आरबीआई करेंसी स्वैपिंग के तहत बैंकों से डॉलर खरीद रही है और बैंकिंग सिस्टम को कई हजार करोड़ रुपए दे रही है. जिससे रुपए को मामूली सपोर्ट मिल सकता है. लेकिन ये सपोर्ट सीमित रह सकता है |
कैसा रह सकता है रुपए का भविष्य?
रुपए पर बोलते हुए कोटक सिक्योरिटीज के करेंसी एंड कमोडिटी हेड अनिंद्या बनर्जी ने कहा कि बॉन्ड और इक्विटी दोनों में लगातार विदेशी निवेश निधि (FPI) की निकासी के कारण USDINR पर दबाव बना हुआ है | ग्लोबल यील्ड में वृद्धि के साथ, USD और JPY के कैरी ट्रेडों के अनवाइंडिंग से भारतीय बॉन्डों पर दबाव बढ़ रहा है. हालांकि, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर कुछ सकारात्मक पहलू भी हैं, जो रुपये को बीच-बीच में राहत प्रदान कर सकते हैं | विश्लेषक ने आगे कहा कि कुल मिलाकर, हम स्पॉट पर 89.50-91.00 के व्यापक ट्रेडिंग दायरे की उम्मीद करते हैं |
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