दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने क्रिकइंफो के लिए लिखे अपने एक लेख में भारतीय टेस्ट टीम के मौजूदा हालात पर अपनी राय साझा की है। उनका मानना है कि जहां सफेद गेंद (वनडे और टी20) के क्रिकेट में भारत एक बेहद मजबूत टीम है, वहीं टेस्ट क्रिकेट में वह फिलहाल एक 'ट्रांजिशन फेज' यानी बदलाव के दौर से गुजर रही है।
आयरलैंड
156/7
19.0 ov
संयुक्त अरब अमीरात
YTB
संयुक्त अरब अमीरात ने गेंदबाज़ी का फैसला
बांग्लादेश अंडर-19
6/0
1.2 ov
जिम्बाब्वे अंडर-19
YTB
बांग्लादेश अंडर-19 बल्लेबाज़ी का फैसला
बंगाल
200/10
193/10
हरियाणा
68/4
100/10
हरियाणा को जीतने के लिए 226 रन की जरूरत
उत्तराखंड
460/7d
असम
57/1
140/10
असम 263 रन से पीछे
बड़ौदा
375/10
तमिलनाडु
230/1
तमिलनाडु 145 रन से पीछे
छत्तीसगढ
283/10
हैदराबाद
585/7
हैदराबाद को 302 रन की बढ़त
पंजाब
309/10
कर्नाटक
274/6
कर्नाटक 35 रन से पीछे
मध्य प्रदेश
244/8
187/10
महाराष्ट्र
179/10
मध्य प्रदेश को 252 रन की बढ़त
हिमाचल प्रदेश
168/10
जम्मू एंड कश्मीर
538/7
जम्मू एंड कश्मीर को 370 रन की बढ़त
सर्विसेज
83/4
343/10
रेलवेज
212/10
सर्विसेज को 214 रन की बढ़त
गुजरात
352/10
त्रिपुरा
323/4
त्रिपुरा 29 रन से पीछे
नागालैंड
0/0
366/10
आंध्र
536/9d
नागालैंड 170 रन से पीछे
दिल्ली
49/0
221/10
मुंबई
317/10
दिल्ली 47 रन से पीछे
उत्तर प्रदेश
165/7
237/10
विदर्भ
237/10
उत्तर प्रदेश को 165 रन की बढ़त
ओडिशा
82/2
282/10
झारखंड
263/10
ओडिशा को 101 रन की बढ़त
बावुमा के अनुसार, टेस्ट मैचों में विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने टीम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना 2019 के उस दौर से की है, जब दक्षिण अफ्रीका को भी अपने बड़े खिलाड़ियों के जाने के बाद ऐसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। बावुमा ने कहा कि वनडे में विराट कोहली और रोहित शर्मा की मौजूदगी भारत को मजबूती देती है, लेकिन टेस्ट में इन दोनों की अनुपस्थिति ने टीम की कमजोरी उजागर की है। उन्होंने 2019 की साउथ अफ्रीकी टेस्ट टीम से तुलना करते हुए कहा कि बड़े खिलाड़ियों के जाने के बाद ऐसा दौर हर टीम को झेलना पड़ता है और इसमें कुछ भी असमान्य नहीं है।हेड कोच गौतम गंभीर का पक्ष लेते हुए बावुमा ने बीसीसीआई को सलाह दी है कि वह उन पर दबाव न बनाए और उन्हें 2027 के वनडे वर्ल्ड कप तक का पूरा समर्थन और लंबा समय दे। बावुमा ने अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग-अलग कोच रखने के मॉडल का विरोध करते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उनके मुताबिक, गंभीर के पास सफेद गेंद के क्रिकेट में अच्छे संसाधन मौजूद हैं और वनडे में कोहली व रोहित की मौजूदगी कोच के लिए राहत का कारण बनी रहेगी, जो उन्हें टेस्ट की चुनौतियों से निपटने का समय दे सकती है।बावुमा ने यह भी रेखांकित किया कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में शुभमन गिल की चोट भारत के लिए बड़ा झटका साबित हुई, जिससे टीम को ऋषभ पंत को अस्थायी कप्तान के रूप में उतारना पड़ा और इसका फायदा विपक्षी टीम ने उठाया। उन्होंने अंत में सुझाव दिया कि इस बदलाव के कठिन दौर में भारतीय टीम को शांत रहने की जरूरत है और सीनियर खिलाड़ियों को आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बावुमा का मानना है कि भले ही यह समय चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यही भविष्य की एक मजबूत टेस्ट टीम की नींव रखने का सही रास्ता है।
पाकिस्तान टी-20 वर्ल्ड कप खेलेगा या नहीं? खुद ही दे दिया बड़ा हिंट, लेकिन फिर..
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2025 के आखिरी महीनों में जब दक्षिणी अफ्रीकी की टीम भारत के दौरे पर थी तो उसने भारत से 2 टेस्ट, तीन वनडे और 5 टी-20 मैचों की सीरीज खेली थी। भारत ने वनडे सीरीज को 2-1 से अपने नाम किया था, वहीं सूर्या की कप्तानी में टी-20 में भारतीय टीम का दबदबा रहा था। लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने इतिहास रचते हुए पहली बार भारतीय सरजमीं पर भारत के खिलाफ क्लीन स्वीप किया था और दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत को 2-0 से पटखनी दी थी, जिसके बाद गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठे थे, साथ ही इस बात की भी चर्चा चली थी कि आखिर क्या कारण थे कि विराट कोहली और रोहित शर्मा को असमय टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा।
———————–
📝 Disclaimer
The content of this post is not originally published by us. The news and information provided here are sourced from trusted online sources, including NewsOnline.co.in
. We share this content only for informational and educational purposes. All rights to the original content belong to their respective owners. If you are the original author or copyright holder and wish to have this content removed or modified, please contact us, and we will take immediate action.


