काराकास। दक्षिण अमेरिका में हालात युद्ध के मुहाने पर हैं। अमेरिका और वेनेजुएला के बीच तनाव इस हद तक बढ़ चुका है कि दोनों देशों की सेनाए। आमने-सामने की तैयारी में हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कैरेबियन सागर में अपनी सेना को सैन्य कार्रवाई की अनुमति दे दी है, जबकि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो ने भी चेतावनी दी है की अगर अमेरिका हमला करेगा, तो हम सौ साल तक लड़ेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका का आरोप है कि वेनेजुएला की नौकाएं ड्रग्स की तस्करी में शामिल हैं। इन हमलों के बाद मादुरो ने राजधानी कराकास के पास बने एक बंकर में शरण ली, जिसकी सुरक्षा के लिए क्यूबा की “ब्लैक वॉस्प” कमांडो यूनिट तैनात है। मादुरो के करीबी सहयोगी डायोसदादो कैबेलो ने सेना अधिकारियों से कहा है कि वे “सौ साल की जंग” की तैयारी करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो वेनेजुएला उसे गुरिल्ला युद्ध में उलझा देगा- ठीक वैसे ही जैसे अफगानिस्तान में हुआ था। अमेरिकी खुफिया सूत्रों के मुताबिक मादुरो की योजना है कि अमेरिकी सैनिकों को शहरी इलाकों में कोलेक्टिवोस नामक अर्धसैनिक बलों के जरिए घेर लिया जाए। इन लड़ाकों के पास रूसी एस-300 मिसाइल सिस्टम, एसयू-30 फाइटर जेट, टी-72 टैंक और 6,000 से ज्यादा लग्ला-एसमिसाइलें हैं, जो हेलीकॉप्टरों को गिराने में सक्षम हैं। यही नहीं, कई हथियार हिज्बुल्लाह के लड़ाकों के पास भी हैं, जो ईरान के समर्थन से वेनेजुएला में सक्रिय हैं।
वेनेजुएला के पूर्व खुफिया प्रमुख जनरल के मुताबिक करीब एक हजार हिज्बुल्लाह लड़ाके मर्गारीटा द्वीप पर डेरा डाले हुए हैं। यहां से वे आतंकी नेटवर्क चलाते हैं और वेनेजुएला के नागरिकों को प्रशिक्षण देते हैं। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि राजधानी कराकास में बने कम्युनिटी सेंटर्स में हिज्बुल्लाह और कोलेक्टिवोस मिलकर सैन्य प्रशिक्षण और विचारधारा की ब्रेनवॉशिंग करते हैं।
अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर वॉशिंगटन ने हमला किया, तो उसे 48 घंटों में नियंत्रण हासिल करना होगा, अन्यथा हालात अफगानिस्तान या गाजा जैसे हो सकते हैं। अमेरिकी नौसैनिक जहाज पहले से ही वेनेजुएला के तटों पर मौजूद हैं और एफ-35 स्टील्थ जेट्स प्यूर्टो रिको से वेनेजुएला के एयर डिफेंस सिस्टम का परीक्षण कर रहे हैं।
राष्ट्रपति मादुरो का दावा है कि वे 40 लाख नागरिक मिलिशिया को युद्ध में उतारने के लिए तैयार हैं। अमेरिकी विश्लेषक का कहना है कि वेनेजुएला में अमेरिकी मिशन की सफलता जिसमें मादुरो की गिरफ्तारी भी शामिल है, केवल 30 फीसदी संभावना रखती है। मादुरो अगर देश छोड़कर ब्राजील या कोलंबिया भागते हैं, तो अमेरिका के सामने नई चुनौती खड़ी हो जाएगी। मौजूदा हालातों को देखकर यह साफ है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो यह युद्ध सिर्फ दो देशों के बीच नहीं बल्कि एक ऐसा लंबा गुरिल्ला संघर्ष बन सकता है, जो आने वाले सालों तक लैटिन अमेरिका की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था को हिला देगा।
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