चीनी उत्पादन 12.43 फीसदी बढ़ा; आईआईएम मुंबई का रुतबा बढ़ा, घरेलू पैकेज सालाना 71.4 लाख तक पहुंचा

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चीनी उत्पादन अक्तूबर में शुरू हुए चालू विपणन सूत्र में फरवरी/तक 12.43 फीसदी बढ़कर 2.47 करोड़ पहुंच गया। महाराष्ट्र और कर्नाटक से अधिक उत्पादन से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विपणन वर्ष 2024-25 की सेसान अवधि में यह 2.2 करोड़ टन रहा थोर "भारतीय चीनी एवं जैव-ईंधन विनिमौष्य संघ (इस्मा) ने कहा, देश के फ्रीर्ष चीनी उत्पादक राज्य महोष्ट्र में उत्पादन चालू विपण वर्ष में फरवरी तक 75 लाख टेम से बढ़कर 95.3 लाख टन हो गया। दूसरे सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश में उत्पादन 73 लाख टन से मामूली बढ़कर74.8 लाख टन हो गया। कर्नाटक का उत्पादन 38.2 लाख टन से बढ़कर 44.5 लाख टन हो गया। मौजूदा समय में कुल 305 कारखाने चालू हैं, जबकि पिछले साल की समान अवधि में 330 मिलें चल रही थीं। इस्मा ने कहा, दक्षिण कर्नाटक में कुछ मिलों के जून/जुलाई से सितंबर, 2026 तक विशेष सत्र के दौरान परिचालन फिर से शुरू करने की उम्मीद है। उद्योग न्यूनतम बिक्री मूल्य में जल्द बढ़ोतरी का इंतजार कर रहा है। महाराष्ट्र में 15 फरवरी तक बकाया 4,601 करोड़ रुपये था, जो पिछले साल की समान अवधि के 2,744 करोड़ रुपये से अधिक है।

आईआईएम मुंबई का रुतबा बढ़ा, घरेलू पैकेज सालाना 71.4 लाख तक पहुंचा

भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) मुंबई ने अपने 2024-2026 बैच के प्लेसमेंट के परिणामों की घोषणा कर दी है। इसमें अधिकतम घरेलू वेतन पैकेज सालाना 71.4 लाख रुपये तक पहुंच गया। वहीं, बीएफएसआई क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में नियुक्तियों में 33 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जो इस सत्र की सबसे अधिक क्षेत्रीय वृद्धि है। संस्थान के मुताबिक, बैच के शीर्ष 10 फीसदी छात्रों को औसतन 47.5 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला, जबकि शीर्ष 20 फीसदी के लिए यह औसत 41.4 लाख रुपये और शीर्ष 50% के लिए 34.5 लाख रुपये रहा।स्नातकों को बैंकिंग, वित्तीय सेवा और बीमा (बीएफएसआई), परामर्श, एफएमसीजी, सामान्य प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, परिचालन, लॉजिस्टिक, दवा और स्वास्थ्य सेवा तथा उत्पाद प्रबंधन जैसे विविध क्षेत्रों में नियुक्तियां मिली हैं। परामर्श क्षेत्र सबसे बड़े भर्ती क्षेत्र के रूप में उभरा, जिसमें 123 प्रस्ताव दिए गए। बीएफएसआई क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में जहां नियुक्तियों में 33 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई वहीं, उपभोक्ता वस्तुओं (एफएमसीजी) के क्षेत्र में 24 फीसदी नौकरियां बढ़ी हैं। साथ ही, लॉजिस्टिक क्षेत्र में भी वृद्धि हुई है, जो आपूर्ति शृंखला और परिचालन रणनीति में संस्थान की विशेषज्ञता को पुष्ट करती है। आईआईएम मुंबई के निदेशक प्रो मनोज कुमार तिवारी ने कहा कि हम प्रबंधन प्रतिभा के प्रति उद्योग के दृष्टिकोण में एक निर्णायक बदलाव देख रहे हैं।

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