पश्चिम एशिया जंग: अभी नहीं होगी उर्वरक की कमी, लेकिन लंबा खिंचा युद्ध बढ़ा सकता है संकट

Date:

देश में फिलहाल किसानों के लिए उर्वरक की पर्याप्त उपलब्धता है, लेकिन अगर पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष लंबे समय तक जारी रहता है तो आने वाले महीनों में समस्या पैदा हो सकती है। यह जानकारी सरकारी कंपनी फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स त्रावणकोर लिमिटेड (फैक्ट) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी है।फैक्ट दक्षिण भारत के राज्यों में उर्वरक की बड़ी आपूर्तिकर्ता कंपनी है। कंपनी उर्वरक बनाने के लिए रॉक फॉस्फेट और फॉस्फोरिक एसिड जैसे कच्चे माल पर निर्भर करती है, जो पश्चिम एशिया और मध्य पूर्व के कई देशों से समुद्री मार्ग के जरिए भारत लाया जाता है।

फिलहाल देश में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता

कंपनी के प्रबंध निदेशक एस. सक्तिमणि ने बताया कि फिलहाल देश में यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है और खरीफ सीजन के लिए कोई समस्या नहीं होगी। उन्होंने उम्मीद जताई कि युद्ध की स्थिति एक महीने के अंदर सामान्य हो सकती है। एस. सक्तिमणि के अनुसार  वर्तमान में भारत में कोई फसल कटाई का मौसम नहीं है, और यह जुलाई के बाद ही शुरू होगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि खरीफ मौसम के लिए यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता है और उम्मीद है कि युद्ध की स्थिति एक महीने के भीतर सुलझ जाएगी। इससे किसानों को कोई समस्या नहीं होगी।

सप्लाई पर पड़ सकता है असर

हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह स्थिति छह महीने तक बनी रहती है तो अगले फसल सीजन, यानी रबी सीजन में उर्वरक की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इस संभावना को देखते हुए सरकार और कंपनियां पहले से ही जरूरी कदम उठा रही हैं।  फैक्ट न केवल मध्य पूर्व से, बल्कि ऑस्ट्रेलिया से भी गैस प्राप्त करती है। वर्तमान में गैस आपूर्ति में कोई बड़ी समस्या नहीं है, हालांकि कुछ स्थानों पर अस्थिरता है, लेकिन यह उर्वरक क्षेत्र के लिए चिंता का विषय नहीं है। अधिकारी ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न कंपनियों से डाई-अमोनियम फॉस्फेट (DAP) और डबल सुपर फॉस्फेट (DSP) के स्टॉक की खरीद कर ली है, जिससे कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी।

1.4 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक

बताया गया है कि अभी कंपनी के पास करीब 1.4 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का स्टॉक है। मार्च और अप्रैल 2026 के दौरान कंपनी लगभग 1.5 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का उत्पादन करने की स्थिति में है। कंपनी का लक्ष्य सितंबर 2026 तक खरीफ सीजन के लिए लगभग 5.5 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का उत्पादन करना है, जबकि करीब 1 लाख मीट्रिक टन उर्वरक आयात करने की भी योजना है। कंपनी ने कहा कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार के सहयोग से उर्वरक की सप्लाई बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।बता दें कि भारत में खरीफ की फसलें जून-जुलाई में मानसून के आगमन के साथ बोई जाती हैं और सितंबर-अक्तूबर में काटी जाती हैं, जबकि रबी की फसलें अक्तूबर -नवंबर में बोई जाती हैं और अप्रैल-मई तक काटी जाती हैं। यूरिया का उपयोग दोनों मौसमों में पैदावार बढ़ाने के लिए व्यापक रूप से किया जाता है।

———————–
📝 Disclaimer

The content of this post is not originally published by us. The news and information provided here are sourced from trusted online sources, including NewsOnline.co.in
. We share this content only for informational and educational purposes. All rights to the original content belong to their respective owners. If you are the original author or copyright holder and wish to have this content removed or modified, please contact us, and we will take immediate action.

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

More like this
Related

H S Detectives Upgrades Online Presence, Expands Services Nationwide

H S Detectives has upgraded its online presence with...

Sanjay Sinha Honored Again for His Contribution to Cinema and Society

Sanjay Sinha has once again been honored, this time...

Kerala Entrepreneur Ajeesh Naduvilottil Expands Global Reach Through Strategic Ventures

Ajeesh Naduvilottil continues to expand his influence in the...

Dr. Raju Akurathi: A Catalyst for Employment and Entrepreneurship

Through his innovative initiatives, Dr. Raju Akurathi is promoting...