COP30 में जलवायु संकट पर चर्चा, अमेरिका के रुख से बढ़ी वार्ता की जटिलताएं

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व्यापार: ब्राजील के अमेजन क्षेत्र में शुरू हुई संयुक्त राष्ट्र की जलवायु वार्ता (COP30) में वैश्विक नेताओं ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तेजी, सहयोग और ठोस कदम उठाने की अपील की है। बीते तीन दशकों से दुनिया कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में काम कर रही है, लेकिन अब इस प्रक्रिया को और तेज करने की जरूरत पर जोर दिया गया है।

देशों को एकजुट होकर काम करने की जरूरत 
इस साल के सम्मेलन के अध्यक्ष आंद्रे कोर्रिया डो लागो ने कहा कि सभी देशों को मुतिराओ की भावना से एकजुट होकर काम करना चाहिए। यह एक ब्राजीली शब्द है, जो एक आदिवासी भाषा से लिया गया है और जिसका अर्थ है साझा कार्य के लिए सामूहिक प्रयास।

लागो ने वार्ता से पहले प्रतिनिधियों को लिखे पत्र में कहा कि या तो हम अपनी इच्छा से, साथ मिलकर बदलाव का फैसला करें, या फिर हम पर एक त्रासदी थोपी जाएगी। हम बदल सकते हैं। लेकिन हमें यह सब मिलकर करना होगा। 

अमेरिका इस एकजुटता को जटिल बना रहा है
अमेरिका इस एकजुटता के आह्वान को और जटिल बना रहा है। ट्रंप प्रशासन ने वार्ता में उच्च-स्तरीय वार्ताकारों को नहीं भेजा है। एक बार फिर पेरिस समझौते से बाहर निकलने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह वही समझौता है, जिसे यहां आंशिक सफलता के रूप में मनाया जा रहा है।

अमेरिका अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार 
अमेरिका अब तक दुनिया में कोयला, तेल और गैस जलाने से पैदा हुए सबसे अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार देश रहा है। हालांकि वर्तमान में चीन सबसे बड़ा प्रदूषक है, लेकिन वैज्ञानिकों के मुताबिक कार्बन डाइऑक्साइड सदियों तक वातावरण में बनी रहती है, इसलिए ऐतिहासिक रूप से अमेरिका का उत्सर्जन प्रभाव अब भी भारी है।

मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण 
पलाऊ की राजदूत और एलायंस ऑफ स्मॉल आइलैंड स्टेट्स की अध्यक्ष इलाना सिड ने कहा कि वर्तमान भू-राजनीतिक माहौल बेहद चुनौतीपूर्ण है। अमेरिका का पेरिस समझौते से बाहर होना पूरी वार्ता प्रक्रिया के संतुलन को हिला देता है। छोटे द्वीपीय देश जलवायु परिवर्तन के सबसे गंभीर प्रभावों से जूझ रहे हैं, समुद्र का बढ़ता स्तर उनकी जमीन को निगल रहा है।

जलवायु वार्ता की तुलना डिनर पार्टी से 
पूर्व अमेरिकी जलवायु दूत टॉड स्टर्न ने ट्रंप प्रशासन की आलोचना करते हुए कहा कि यह अच्छी बात है कि उन्होंने किसी प्रतिनिधि को नहीं भेजा। अगर भेजते भी, तो उसका कोई सकारात्मक असर नहीं होता।

नेचर कंजर्वेंसी की मुख्य वैज्ञानिक कैथरीन हेहो ने मौजूदा जलवायु वार्ता की तुलना एक डिनर पार्टी से की। उन्होंने कहा कि हर देश अपनी हिस्सेदारी लेकर आता है यानी अपने नए और मजबूत जलवायु लक्ष्यों के साथ। लेकिन यह साफ दिखता है कि कौन ताजा फल से बना पाई लेकर आया है और कौन फ्रीजर में रखे सालभर पुराने चिकन नगेट्स लेकर आया। उन्होंने कहा कि इस बार अमेरिका बतौर देश खाली हाथ आया है, हालांकि उसके कई शहर, राज्य और कंपनियां इस कमी को पूरा करने की कोशिश करेंगी।

अमेजन से दुनिया को नई रफ्तार देने पर जोर 
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र के जलवायु प्रमुख साइमन स्टील ने रविवार रात जारी अपने पत्र में कहा कि पेरिस समझौता कुछ हद तक असर दिखा रहा है, लेकिन हमें अमेजन से दुनिया को एक नई रफ्तार देनी होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि जलवायु संकट के विनाशकारी प्रभाव पहले ही दिख रहे हैं, कैरेबियन में तूफान मेलिसा की तबाही, वियतनाम और फिलीपींस में सुपर टाइफून, और दक्षिणी ब्राजील में आए बवंडर इसके ताजा उदाहरण हैं। स्टील ने कहा कि देशों को न केवल तेजी से कदम उठाने होंगे, बल्कि जलवायु कार्रवाई को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ना भी होगा।

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