लगातार तीसरे दिन करेंसी मार्केट में इजाफा देखने को मिला है. खास बात तो ये है कि रुपया डॉलर के मुकाबले 90 से और बेहतर होते हुए 89 के लेवल पर आ गया है. तीन दिनों में रुपया अपने रिकॉर्ड लो से 1.25 फीसदी मजबूत हो चुका है | जानकारों की मानें तो आरबीआई के हस्तक्षेप की वजह से रुपए में तेजी देखने को मिल रही है | वहीं खाड़ी देशों के कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर से नीचे आ गई हैं. वहीं विदेशी निवेशकों के निवेश की वजह से भी रुपए में सुधार देखने को मिला है. इसके अलावा ओमान के साथ एफटीए होने के बाद भी स्थिति में सुधार हुआ है. वैसे रुपए के लिए संकट अभी भी कम नहीं हुआ है | अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर कोई बात नहीं बन सकी है. साथ अमेरिकी टैरिफ की मार अभी भी कायम है. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर करेंसी मार्केट में किस तरह के आंकड़े देखने को मिल रहे हैं |
रुपए में तेजी की हैट्रिक
शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे मजबूत होकर 89.96 पर पहुंच गया. कंपनियों से डॉलर की आमद और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से रुपये को मजबूती मिली | फॉरेन करेंसी ट्रेडर्स का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक के संभावित हस्तक्षेप के चलते हाल के हफ्तों में रुपए के लगातार रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद अमेरिकी डॉलर/भारतीय रुपए के जोड़े में यह मजबूती आई है | इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतें लगभग 59 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहने से बाजार का माहौल सकारात्मक रहा |
90 से मजबूत हुआ रुपया
इंटरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 90.19 पर खुला, फिर थोड़ा मजबूत हुआ और 89.96 पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव से 24 पैसे अधिक है. शुरुआती कारोबार में यह अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले 90.22 पर भी पहुंचा. गुरुवार को रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18 पैसे मजबूत होकर 90.20 पर बंद हुआ था | मंगलवार को रुपया एक नए रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया और पहली बार 91 डॉलर प्रति डॉलर के स्तर को पार कर गया. वैसे रुपया मंगलवार के रिकॉर्ड लोअर लेवल से 1.25 फीसदी तक मजूबत हो चुका है |
मिल सकता है उतार चढ़ाव
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि सट्टेबाजों के बाजार से बाहर होने के कारण अमेरिकी डॉलर की खरीदारी में थोड़ी कमी आई है, हालांकि दिन के दौरान इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं | भंसाली ने आगे कहा कि अमेरिकी सीपीआई उम्मीद से कम रहा, लेकिन यह पर्याप्त आंकड़ों के कलेक्शन न होने के कारण भी था, इसलिए अगले महीने का सीपीआई अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है. उन्होंने यह भी कहा कि रुपया 90-90.50 के दायरे में बना हुआ है |
कच्चा तेल सस्ता बाजार में तेजी
- इस बीच, डॉलर सूचकांक, जो छह मुद्राओं की एक टोकरी के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापता है, 0.04 प्रतिशत बढ़कर 98.46 पर कारोबार कर रहा था |
- वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 0.27 प्रतिशत गिरकर 59.66 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था |
- घरेलू शेयर बाजार की बात करें तो, 30 शेयरों वाला बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 375.98 अंक चढ़कर 84,857.79 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 110.60 अंक बढ़कर 25,934.15 पर पहुंच गया |
- विनिमय आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को 595.78 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे |
रुपए की कोई चिंता नहीं
इस बीच, प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) के सदस्य संजीव सान्याल ने गुरुवार को कहा कि उन्हें रुपए को लेकर कोई चिंता नहीं है, क्योंकि चीन और जापान ने भी अपने उच्च विकास काल के दौरान विनिमय दर में कमजोरी देखी थी | एक कार्यक्रम में बोलते हुए सान्याल ने कहा कि 90 के दशक से रुपये को ज्यादातर अपने स्तर पर आने दिया गया है, लेकिन आरबीआई अत्यधिक अस्थिरता को रोकने के लिए अपने भंडार का उपयोग करता है. उन्होंने कहा कि मुझे रुपए की बिल्कुल भी चिंता नहीं है… मैं यह कहना चाहता हूं कि रुपए और उसकी मौजूदा कमजोरी को जरूरी नहीं कि किसी आर्थिक चिंता से जोड़ा जाए, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से, यदि आप समय के साथ देखें, तो आप पाएंगे कि जो अर्थव्यवस्थाएं अपने उच्च विकास चरण में होती हैं, वे अक्सर विनिमय दर की कमजोरी के दौर से गुजरती हैं |
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