इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पीटीआई प्रमुख इमरान खान की सेहत को लेकर आई एक ताजा मेडिकल रिपोर्ट ने पूरे देश में खलबली मचा दी है। रावलपिंडी की अडियाला जेल में बंद इमरान खान एक गंभीर नेत्र रोग से जूझ रहे हैं, जिससे उनकी दाहिनी आंख की रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा पैदा हो गया है। मेडिकल टीम के अनुसार, इमरान खान सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन नाम की बीमारी की चपेट में हैं। इस स्थिति में आंख की रेटिना की नसों में खून का थक्का जम जाता है, जिससे दृष्टि बाधित हो जाती है। यदि उन्हें तुरंत विशेषज्ञ उपचार नहीं मिला, तो वे अपनी एक आंख की रोशनी पूरी तरह खो सकते हैं।
पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉक्टरों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जेल में उनकी जांच करने के बाद स्पष्ट चेतावनी दी है कि इमरान खान को तत्काल एक विशेषज्ञ अस्पताल और अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर की आवश्यकता है। डॉक्टरों का मानना है कि जेल के भीतर उपलब्ध सीमित संसाधनों से उनकी आंख का इलाज करना संभव नहीं है। उत्तर पाकिस्तान में चल रही भीषण शीतलहर और जेल की सूखी ठंड ने उनकी एलर्जी और संक्रमण को और अधिक गंभीर बना दिया है, जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही है। इमरान खान की पार्टी और उनके परिवार ने वर्तमान शहबाज शरीफ सरकार और सैन्य प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी बहनों, अलीमा और उज्मा खान का कहना है कि इमरान को जानबूझकर सॉलिटरी कन्फाइनमेंट (काल कोठरी) में रखकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। 2 दिसंबर 2025 से पिछले लगभग 55 दिनों से उन्हें दुनिया से पूरी तरह काटकर रखा गया है। टॉर्चर की इंतहा यह है कि उन्हें उनके वकीलों और सगे परिजनों तक से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही है। समर्थकों के बीच यह डर गहराता जा रहा है कि यह जेल में उनके मेडिकल मर्डर की एक सोची-समझी साजिश है ताकि उन्हें शारीरिक रूप से अक्षम किया जा सके। इमरान की बहनों ने मांग की है कि उन्हें फौरन शौकत खानम अस्पताल स्थानांतरित किया जाए, जहां उनका उचित इलाज हो सके। इस बीच, 31 जनवरी 2026 को होने वाला अगला मेडिकल रिव्यू पाकिस्तान की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकता है। यदि मेडिकल रिपोर्ट में उनकी हालत और बिगड़ी हुई पाई गई, तो पाकिस्तान की सड़कों पर उनके समर्थकों का गुस्सा फूट सकता है, जिससे गृहयुद्ध जैसी स्थितियां पैदा होने की आशंका जताई जा रही है। जेल प्रशासन और सरकार ने फिलहाल इन आरोपों पर चुप्पी साध रखी है, लेकिन बढ़ता तनाव किसी बड़े राजनीतिक विस्फोट की ओर इशारा कर रहा है।
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