सेबी का नया सर्कुलर: क्या म्यूचुअल फंड योजनाओं की संरचना, नामकरण और पारदर्शिता में होगा बड़ा बदलाव? आइए समझें

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भारतीय प्रतिभूति और विनियम बोर्ड (सेबी) ने 26 फरवरी को एक नया परिपत्र जारी कर म्यूचुअल फंड योजनाओं के वर्गीकरण और संरचना में व्यापक बदलाव किए हैं। सेबी की ओर से किए गए इन बदलावों में नई कैटेगरी भी जोड़ी गईं, जिसमें कॉन्ट्रा फंड, सेक्टोरल डेट फंड और लक्ष्य आधारित लाइफ साइकिल फंड के साथ ही योजना के नामकरण, पोर्टफोलियो ओवरलैप और परिसंपत्ति आवंटन के लिए भी दिशानिर्देश निर्धारित किए गए हैं।

क्या है इसका उद्देश्य?

इसका मुख्य उद्देश्य निवेशकों के लिए स्पष्टता और पारदर्शिता को बढ़ाने के साथ कई योजनाओं में दोहराव के जोखिम को कम करना भी है।परिसंपत्ति प्रबंधक कंपनियों (एएमसी) को परिपत्र जारी होने की तिथि से छह महीने के भीतर सभी मौजूदा योजनाओं में ये बदलाव लागू करने होंगे।मूल्य और कॉन्ट्रा फंड सेबी ने यह निर्धारित किया है म्यूचुअल फंड, वैल्यू फंड और कॉन्ट्रा फंड दोनों की पेश कर सकते हैं, लेकिन शर्त यह है कि दोनों के पोर्टफोलियो में 50 प्रतिशत से अधिक का ओवरलैप नही होना चाहिए। सेक्टोरल और थीमेटिक इक्विटी योजनाओं के लिए समान कैटेगरी की अन्य इक्विटी योजनाओं और अन्य इक्विटी श्रेणियों (इसमें लार्ज कैप योजनाओं को शामिल नहीं किया गया है) के साथ ओवरलैप 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।

योजनाओं के नामकरण को लेकर क्या किए गए बदलाव?

सेबी के परिपत्र में योजनाओं के नाम को लेकर भी स्पष्टता लाई गई है, इसमें योजना का नाम उसकी श्रेणी के अनुरूपर होना जरूरी है।नियामक ने योजना के नाम में केवल लाभ पर जोर देने वाले शब्दों या वाक्यों के प्रयोग पर रोक लगा दी है, जिसमें सभी योजनाएं अपने नाम के अनुरूप बनी रहे ।सेबी ने स्पष्ट किया है कि केवल नामकरण मानदंडों को पूरा करने के लिए किए गए बदलावों को मूलभूत विशेषता परिवर्तन नहीं माना जाएगा।परिसंपत्ति प्रबंधकों को परिपत्र जारी होने की तिथि से छह महीने के अंदर सभी मौजूदा योजनाओं में ये बदलाव लागू करने का आदेश है।
 
परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी के लिए क्या है नए नियम?

सेबी ने निवेशकों के लिए और अधिक पारदर्शिता बढ़ाने के लिए म्यूचुअल फंड्स को अब अपनी परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनी (एएमसी) को वेबसाइट्स पर कैटेगरीवाइज पोर्टफोलियो ओवलैप (जैसे इक्विटी योजनाओं और अन्य इक्विटी पेशकशों के बीच डेट योजनाओं और हाइब्रिड योजनाओं के बीच) खुलासा करना अनिर्वाय किया है। इन खुलासों को मासिक रूप से अपेडेट करना होगा, जिससे पोर्टफोलियो की समानताओं के सही तरह से समझने में आसानी होगी और निवेशकों को सही दिशा में निवेश करने में मदद मिलेगी।

लाइफ साइकिल फंड के तहत कैसी शुरुआती की गई?

सेबी के नए नियमों के तहत एक प्रमुख लाइफ साइकिल फंड्स की शुरुआत की गई है।यह ओपन एंडेड फंड लक्ष्य आधारित निवेश के लिए बनाया गया है।इसमें इक्विटी, डेट, इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) एक्सचेंज-ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स (ETCDs) और गोल्ड एंड सिल्वर ईटीएफ में  निर्धारित परिपक्वता अवधि और ग्लाइड पाथ सुविधा होती है।लाइफ साइकिल फंड्स को 5 से 30 वर्षों के लिए पांच के गुणाकों में पेश किया जा सकता है और एसेट मैनेजर किसी भी समय सदस्यता के लिए अधिकतम छह सक्रिय फंड रख सकते हैं।अगर किसी फंड की परिपक्वता अवधि एक साल से कम है, तो यूनिटहोल्डर की सहमति के इसे जल्द ही परिपक्वता वाले लाइफ साइकिल फंड में विलय करना होगा।

क्या है निकासी शुल्क संरचना?

लाइफ साइकिल फंड्स में निवेश करने वालों निवेशकों में वित्तीय अनुशासन को बढ़ावा देने के लिए सेबी ने एक निकासी शुल्क संरचना शुरू की है, जिसमें पहले साल निकासी पर 3 प्रतिशत का शुल्क, दूसरे साल 2 प्रतिशत और निवेश के तीसरे साल में 1 प्रतिशत शुल्क लागू होगा। यह फंड मल्टी एसेट एलोकेशन फंड्स के लिए निर्धारित बेंचमार्क ढांचे का पालन करेंगे और योजनाओं के नाम पर उनकी परिपक्वता अवधि शामिल होगी, जैसे कि 'लाइफ साइकिल फंड 2045'। पांच साल से कम परिपक्वता वाली अवधि के लिए लाइफ साइकिल फंड्स 50 प्रतिशत तक इक्विटी आर्बिट्रेज एक्सपोजर ले सकते है, लेकिन इक्विटी निवेश 65 से 75 प्रतिशत के भीतर होना आवश्यक है।  अलग-अलग फंड कैटेगरी के लिए खास एसेट एलोकेशन लिमिट बदले हुए नियम के तहत अलग-अलग फंड कैटेगरी के लिए खास एसेट एलोकेशन लिमिट बताई गई है ।इक्विटी फंड में, स्कीम के फंड का बचा हुआ हिस्सा, जो उसकी मुख्य क्लास में इन्वेस्ट नहीं किया जाता है, उसे मौजूदा रेगुलेटरी लिमिट के तहत इक्विटी, मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट, सोना और चांदी और परमिटेड इन्वेस्टमेंट (इनवेंटेड इन-हाउस इन्वेस्टमेंट) में एलोकेट किया जा सकता है।लोन स्कीम के लिए, बचा हुआ हिस्सा ओवरनाइट, लिक्विड, अल्ट्रा-शॉर्ट, लो ड्यूरेशन और मनी मार्केट फंड को छोड़कर इनवेंटेड इन-हाउस इन्वेस्टमेंट में इन्वेस्ट किया जा सकता है।हाइब्रिड फंड में, बचा हुआ हिस्सा एसेट क्लास लिमिट के अंदर इनवेंटेड इन-हाउस इन्वेस्टमेंट (आर्बिट्रेज फंड को छोड़कर) सोना और चांदी ईटीएफ में एलोकेट किया जा सकता है।
 
क्षेत्रीय ऋण निधि के लिए क्या?

नए परिपकत्र में क्षेत्रीय ऋण निधियों का उल्लेख किया गया है, जिन्हे म्यूचुअल फंड तभी जारी कर सकते हैं जब लक्षित क्षेत्र में निवेश योग्य ऋणों की पर्याप्त उपलब्धता हो। मध्य और लंबी अवधि के ऋण निधियों के लिए निधि प्रबंधक ब्याज दरों में प्रतिकूल उतार चढाव की आशंका से पोर्टफोलियो की अवधि को एक साल से कम कर सकते है, लेकिन इसके लिए सेबी का निरीक्षण कम से कम तीन और चार साल की न्यूनमत पोर्टफोलियों की समय सीमा से नीचे नहीं हो और जरूरी दस्तावेजों और औचित्य भी सिद्ध करना जरूरी होगा।

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