पाकिस्तान में फिर होगा बवाल- इमरान की तीनों बहनें आदियाला जेल के बाहर धरने पर बैठीं

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रावलपिंडी। पाकिस्तान की सरकार इन दिनों भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर दबाव में दिखाई दे रही है। एक ओर आर्थिक बदहाली और सुरक्षा चुनौतियां हैं, तो दूसरी ओर जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहनों ने सरकार और सैन्य नेतृत्व के लिए नई परेशानी खड़ी कर दी है। अपने भाई से मुलाकात न हो पाने से नाराज इमरान खान की बहनों ने एक बार फिर खुला विरोध शुरू कर दिया है। सिर्फ 20 मिनट की सीमित मुलाकात के बाद दोबारा किसी को मिलने की अनुमति न मिलने से आक्रोश और बढ़ गया है। इसी के चलते इमरान खान की बहनें पार्टी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ आदियाला जेल के पास धरने पर बैठ गई हैं और लंबे आंदोलन का संकेत दे दिया है।
इमरान खान की बहनों का कहना है कि अदालत के स्पष्ट आदेशों के बावजूद जेल प्रशासन और सरकार मुलाकात में लगातार बाधा डाल रहे हैं। इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने 24 मार्च को आदेश दिया था कि इमरान खान से हर सप्ताह मंगलवार और गुरुवार को मुलाकात की अनुमति दी जाए। हालांकि पार्टी का आरोप है कि इस आदेश का नियमित रूप से पालन नहीं किया जा रहा। बहनों का कहना है कि अदालत के फैसले के ऊपर जेल प्रशासन का रवैया सवाल खड़े करता है और ऐसा प्रतीत होता है जैसे जेल कानून से ऊपर हो गई हो।
पिछले कई हफ्तों से अलीमा खान, उज्मा खान और नोरीन खान नियाजी लगातार इमरान खान से मिलने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगी है। हाल ही में जब मुलाकात की अनुमति नहीं दी गई तो पार्टी समर्थकों के साथ मिलकर उन्होंने धरना दिया। इस दौरान भीड़ को हटाने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया गया, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए।
मंगलवार को एक बार फिर इमरान खान की बहनें जेल की ओर मार्च करती नजर आईं। रास्ते में उन्हें रोक दिया गया, लेकिन उन्होंने वहीं बैठकर धरना देने का फैसला कर लिया। मार्च के दौरान अलीमा खान ने कहा कि उन्हें जहां भी रोका जाएगा, वे वहीं शांतिपूर्ण तरीके से बैठेंगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे लंबे धरने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मीडिया के सामने उन्होंने गर्म कपड़े और कंबल दिखाते हुए संकेत दिया कि विरोध अनिश्चित समय तक चल सकता है।
धरनास्थल पर बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे, वहीं सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी देखने को मिले। अलीमा खान ने कहा कि उनका विरोध न तो गैरकानूनी है और न ही असंवैधानिक। उनका कहना था कि वे केवल अदालत के आदेशों को लागू कराने और अपने बुनियादी अधिकारों की मांग कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में संविधान, लोकतंत्र और कानून के शासन को कमजोर किया जा रहा है, जिसके खिलाफ आवाज उठाना मजबूरी बन गया है। अलीमा खान ने देश की मौजूदा स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है, अफगानिस्तान के साथ व्यापार बंद होने से बेरोजगारी बढ़ रही है और सुरक्षा हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। उन्होंने सरकार से यह भी मांग की कि 2 दिसंबर को इमरान खान और उनकी बहन उज्मा के बीच हुई संक्षिप्त मुलाकात में किन राजनीतिक मुद्दों पर बातचीत हुई थी, इसकी जानकारी परिवार को दी जाए। उनका कहना था कि यदि राजनीतिक विषयों पर चर्चा हुई है तो उस पर पार्टी नेतृत्व से बात की जानी चाहिए। इमरान खान की बहनों का यह विरोध अब केवल निजी मुलाकात तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह सरकार की नीतियों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सीधा सवाल बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं।

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