डिएगो गार्सिया पर ट्रंप की दो टूक: सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे ये हमारा अधिकार

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वॉशिंगटन। हिंद महासागर के रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण द्वीप डिएगो गार्सिया को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि वे इस द्वीप पर अमेरिकी सेना की मौजूदगी और परिचालन को कभी भी खतरे में नहीं पड़ने देंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में कोई समझौता टूटता है या अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा पर आंच आती है, तो उनके पास बेस को सैन्य तरीके से सुरक्षित और मजबूत करने का पूर्ण अधिकार है।
अपने हालिया बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि उन्होंने डिएगो गार्सिया द्वीप के भविष्य को लेकर ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के साथ सीधी बातचीत की है। यह द्वीप हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य स्तंभ माना जाता है। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि विदेशों में स्थित अमेरिकी सैन्य बेस केवल भौतिक संपत्ति नहीं हैं, बल्कि ये अमेरिकी सैनिकों की ताकत, आधुनिक उपकरणों की क्षमता और रणनीतिक स्थिति का संगम हैं, जिन्होंने पिछले वर्षों में कई ऑपरेशनों को सफल बनाया है। यूनाइटेड किंगडम और मॉरीशस के बीच इस द्वीप को लेकर हुए हालिया लीज समझौते पर ट्रंप ने संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री स्टार्मर की स्थिति को समझते हैं और कई जानकारों के अनुसार, यह उस समय संभव सबसे बेहतर डील थी। हालांकि, राष्ट्रपति ने कूटनीतिक शिष्टाचार के साथ-साथ कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने साफ कहा कि अगर यह लीज डील भविष्य में कभी बाधित होती है या कोई बाहरी तत्व अमेरिकी बेस को धमकी देता है, तो वे बल प्रयोग से पीछे नहीं हटेंगे।
ट्रंप ने उन चुनौतियों और दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया जो अक्सर मानवाधिकारों या पर्यावरण के नाम पर इस बेस की मौजूदगी पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने इसे बकवास करार देते हुए कहा कि झूठे दावों के आधार पर वे दुनिया के इस सबसे महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र को कमजोर नहीं होने देंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने भी राष्ट्रपति के इस रुख की पुष्टि की है। उन्होंने ब्रीफिंग के दौरान कहा कि अमेरिका अपनी संपत्तियों की रक्षा करने का संप्रभु अधिकार रखता है और डिएगो गार्सिया सहित दुनिया के किसी भी कोने में अपनी सैन्य शक्ति को बनाए रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। डिएगो गार्सिया न केवल हिंद महासागर का एक हब है, बल्कि यह मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण एशिया में अमेरिकी सैन्य प्रभाव बनाए रखने के लिए केंद्रीय भूमिका निभाता है। लंबे समय से संप्रभुता के विवादों में घिरे इस द्वीप पर ट्रंप का यह बयान यह संकेत देता है कि नई अमेरिकी सरकार अपनी विदेशी सैन्य नीति में किसी भी तरह के समझौते के मूड में नहीं है। राष्ट्रपति के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में यह संदेश भेज दिया है कि डिएगो गार्सिया की सुरक्षा अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

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