तेहरान। ओमान की राजधानी मस्कट में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली महत्वपूर्ण परमाणु वार्ता से ठीक पहले पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है। फारस की खाड़ी में बारूद की गंध उस समय तेज हो गई जब ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (आईआरजीसी) ने बीच समंदर में एक बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए दो विदेशी जहाजों को अपने कब्जे में ले लिया। ईरान का दावा है कि ये जहाज एक संगठित नेटवर्क के जरिए ईरानी खजाने यानी डीजल की तस्करी कर रहे थे।
ईरानी नौसेना के अनुसार, गुरुवार 5 फरवरी को फारसी द्वीप के पास की गई इस कार्रवाई में जब्त किए गए जहाजों से 10 लाख लीटर से अधिक ईंधन बरामद किया गया है। जहाजों पर सवार 15 विदेशी क्रू मेंबर्स को हिरासत में लेकर बुशहर बंदरगाह भेज दिया गया है। हालांकि ईरान ने अभी तक यह खुलासा नहीं किया है कि ये जहाज किस देश के थे, लेकिन इस घटना की टाइमिंग ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है।
जहाजों की जब्ती के कुछ ही घंटों बाद ईरान के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी इज्जतुल्लाह जरघामी ने अमेरिका को सीधी और तीखी सैन्य चेतावनी जारी की। जरघामी ने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में लिखा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अमेरिका के लिए नर्क की जगह बनेगा। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की ताकत का मजाक उड़ाते हुए कहा कि युद्ध की स्थिति में अमेरिकी जहाजों का अंजाम भयानक होगा और ईरान यह साबित कर देगा कि ऐतिहासिक रूप से इस क्षेत्र पर उसी का अधिकार है। यह घटनाक्रम 7 फरवरी को ओमान में होने वाली भारत-अमेरिका-ईरान से जुड़ी कूटनीतिक हलचलों और परमाणु वार्ता से ठीक पहले हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बढ़ते सैन्य दबाव और परमाणु ठिकानों पर संभावित हमलों की धमकियों के बीच ईरान अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन कर कूटनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश कर रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की दुखती रग माना जाता है क्योंकि वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20-25 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान अक्सर इस रास्ते को बंद करने की धमकी देकर अंतरराष्ट्रीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाता रहा है। इस ताजा सैन्य कार्रवाई ने वार्ता की मेज पर बैठने से पहले माहौल को और अधिक विस्फोटक बना दिया है।
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